जिंदगी के पीछे भागता मुसाफिर

जिंदगी के पीछे भागता मुसाफिर

शहर भाग रहा था,जिंदगियां भाग रही थी।
कुछ ज़रूरतों के पीछे भाग रहे थे।
तो कुछ को मंज़िल बुला रही थी। बस,ट्रैन ,गाड़ियां सब भाग रही थी।सभी को ही जल्दी थी।एक भिखारी सड़क के किनारे बैठ सबकुछ देख रहा था।
उस लम्बी सड़क को, शून्य हुए ठहराव को और भागते पलो को।कभी कभी उसकी नज़रे कटोरे पर आ जाती थी।
जिसमे कुछ सिक्के उसे खैरात में मिले थे।।
वह ऊपरवाले का शुक्र अदा कर रहा था।
इन भागते दौड़ते लोगो ने थोड़ा टाइम निकाल उसकी भी जरूरत का ख्याल रखा था।

शाम रात ने परिवर्तित हो रही थी।सूरज को बादलों ने अंदर कर लाया था
ठीक वैसे ही जैसे खेल कर लौट रहे बच्चों को मां अंदर बुला लेती है।
लोग राशन,साग-सब्जी खरीदकर अपने अपने ड्यूटी से लौट रहे थे। सबका एक स्थायी ठिकाना था, एक परिवार था।
अपनो को अपनो से मिलना था।
उस भिखारी ने भी चलना शुरू किया
लेकिन न तो कोई उसका अपना था।
,न ही कोई मंज़िल थी। वह लम्बी सड़क ही उसके चलने का प्रेरणास्रोत बननी थी।
सड़क पर जल रही लाइटों के बीच वह बहुत सारी चीज़ें देख पा रहा था।
पिता को बेटी के लिए गुब्बारे खरीदते।वह खुश हुआ,
पिता-पुत्री के प्रेम को देखकर।निराश भी हुआ,गुब्बारे खरीदने वाली बच्ची और बेचने वाली की उम्र समान थी।
एक बेटा व्हील चेयर पर बैठे अपने पिता को कही ले जा रहा था।
एक पांच साल का बेटा अपने असमर्थ मां से आइस क्रीम की ज़िद कर रहा था,
देखने से लग रहा था कि वह औरत दुसरो के घर काम कर के गुज़ारा करती है।
इस तरह के किरदारों को देखकर उसका दिल भर आया लेकिन अगले ही पल उसे याद आया कि वह भी इन परिस्थितियों का मारा है

दूसरी तरफ एक औरत अपने बच्चों को कार से उतारती है,
उसे ढेर सारे खिलौने और खाने का पैकेट्स दिलाती है
और वापस कार में बैठकर चले जाते है।
सब कुछ ऐसे देख रहा था मानो समग्र संसार उसके इर्द गिर्द घूम रहा हो।
धीरे धीरे शहर सन्नाटे की तरफ बढ़ने लगा।
उसने अपने पैसे गिनने शुरू किए। एक,दो,तीन……चालीस। रात के खाने का प्रबंध हो चुका था।

***
दिन गुजरते गया।आते जाते लोगो को देखना,उनके हालातो पर भाव प्रकट करना,सिक्के जमा करना इत्यादि उसकी दिनचर्या थी।
वह शहर से थोड़ी दूर टूटी सी झोपड़ी में रात बिताता था।और खाने के बाद जो पैसे बचते,वह टूटे हुए मिट्टी के बर्तन में डाल देता और बेफिक्री से सो जाता। शहर का तो पता नही पर शहरवासियों पर बड़ा भरोसा था।उसे विश्वास था कि यहा दी हुई चीज वापस नही मांगते।
………….वह अपने पास अपनी पत्नी की फ़ोटो रखता था। अक्सर खाली समय मे उस फ़ोटो को निहारता। उस फ़ोटो से उसके अतीत का बहुत बड़ा सम्बन्ध था।उसका अतीत उसे अक्सर चोट पहुचाता था।

इंसानों के जीवन मे अतीत का बड़ा महत्व होता है,उससे न केवल हम सीख लेते है।
बल्कि ये भी देखते है कि हम कहा थे और कहा पहुचे।

उसका वर्तमान उसके अतीत से हमेशा खफा रहता था।वक्त,किस्मत,हालात सबने एक साथ साजिश के तहत धोखा दिए थे।
कभी कभी वह किसी से ऐसी बाते करता मानो वह कई जीवन जी चुका हो या अनुभव का व्यापार चलता हो।

किसी समय मे वह समंदर पार एक बड़े से शहर में बहुत बड़ा सेठ हुआ करता था।
एक चौथाई शहर की जमीन उसकी होती थी।
रुपये पैसों का तो अम्बार सा लगा था।
दिल से भी काफी अमीर था। उसकी जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि ये थी ।
कि आजतक उसके द्वार से कोई खाली हाथ नही लौटा था।

आगे जारी…….

सौरभ’शुभ’

सिवान,बिहार

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