क्या कहें
*क्या कहें*
मोहब्बत में हुआ,जो हाल जान लीजिए,क्या कहें।
रुसवाईयाँ और,तन्हाईयाँ जान लीजिए,क्या कहें।।
मैं था अकेला,अब संग चली परछाईयाँ,क्या कहें।
दूरियों से नाता जुड़ा,हो गयी है दूरियां,क्या कहें।।
धड़कता तो है दिल मेरा,अब कमज़ोर है,क्या कहें।
मलहम मिलता नहीं,ज़ख़्मों का शोर है,क्या कहें।।
कुछ अभी भी साथी हैं,कुछ से ही संगत है,क्या कहें।
खुशियां चली गयी,उदासियों की रंगत है,क्या कहें।।
समय बदल गया,अब बुरा वक्त हमारा है,क्या कहें।
यादों का पिटारा है,शायद यही सहारा है,क्या कहें।।
कुछ याद न रहता था,अब सिर्फ याद है,क्या कहें।
मैं जिन्दा तो हूँ मगर,अब जिंदगी बर्बाद है,क्या कहें।।
सबकुछ तो खो गया,बाकी अभी चाहत है,क्या कहें।
भुला न सकूं उसको,शायद यही मोहब्बत है,क्या कहें।।
स्वरचित
[केसरवानी©चन्दन]
कानपुर नगर उत्तर प्रदेश
8090921177