हुईहै वही जो राम रची राखा
शीर्षक = हुईहै वही जो राम रची राखा
मै हूं किरायेदार यहां , नही ये मेरा मकान है।
इस देह पर मुझे , किस बात का अभिमान है
उसने जीवन दिया है, वो जब चाहे मार डालेगा
मिट्टी की काया में प्राण, उसका ही योगदान है
वही संहारक है वही पालनहार इस जगत का
उस ईश्वर की कृपा का कहां तुम्हे अनुमान है
रखकर भरोसा भोले पर हर कदम चल रहा हूं
मेरा दाता मेरा भ्राता बस तू ही मेरा भगवान है
प्रभु क्षमा कर दो हमें , हुई अगर कोई भूल हो
हाथ जोड़े खड़ा तेरी चौखट पर , ये नादान है
मुसीबत में तुम्हे भोले ,मैने जब आवाज दी है
सारी मुश्किलें पलभर में मेरी हुई आसान है।।
स्वरचित
सत्यम द्विवेदी
कानपुर नगर
उत्तर प्रदेश
8960977858