बंधन

🥀छप्पय छंद🥀
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1-
बंधन डारो प्रेम,राम जी दौड़े आवें।
संगम होवै धर्म,राम जी दिल में रावें।।
मीरा वंधन डार,श्याम सँग बंधन बांधो।
पीती है विष हाल,श्याम ने आके साधो।।
सुन बंधन प्रेम विशाल है।
बंधन प्रेम फ़साइए।।
गुन बंधन प्रेम महान है।
अपना काम बनाइए।।
2-
बंधन माया डार,किया है सबको पागल।
बंधन माया काट,साफ कर नैनन काजल।।
बंधन भव का देख,पड़ा है तेरे ऊपर।
बंधन होता मुक्त,धर्म कर आके भूपर।।
भव बंधन राघव काटना।
धर्म राह में डोलिए।।
प्रभु बंधन आकर छोड़ना।
हृदय दया जल घोलिए।।
3-
बंधन राखी राख,हाथ में बांधा वहना।
बंधन भारी मान,मान अब मेरा कहना।।
बंधन डोरी देख,बुने हैं कच्चे धागा।
प्यारे दिल सें लेख,सदा ऐ पक्का लागा।।
है बंधन राखी प्यार का।
कभी तोड़ मत डालना।।
हो आँगन सोना सार सा।
बेटी आँगन पालना।।
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🥀प्रभु पग धूल🥀
लक्ष्मी कान्त सोनी
महोबा
उत्तर प्रदेश

 

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