गणपति*वंदना
*गणपति*वंदना
हे गिरिजा महेश तनय,
सुन लीजे हमारी विनय!
दुःख दरिद्रता हरने वाले,
रिद्धि -सिद्धि करने वाले!
आज पधारो द्वार हमारे,
भक्त तुम्हारे तुम्हें पुकारें!
संकट नें संसार को घेरा,
तू ही आशा का है सवेरा!
हे विनायक विघ्नहर्ता,
हर्ष उमंग आनंदकर्ता!
सृष्टि को दो तुम आशीष,
प्रथमपूज्य हो तुम हे ईश!
जग को दिया है तुमनें संदेश,
माता -पिता सम न कोई श्रेष्ठ!
जय -जय गणपति महाराज,
पूर्ण कीजे मन के काज,
स्वरचित
पूजा मिश्रा
रीवा मध्यप्रदेश