कविता (सरसी छंद)

विधा – – कविता (सरसी छंद)
शीर्षक- भारत भूमि
स्वरचित

शीर्षक- “भारतभूमि”

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गौरवमय है तेरी थाती, हमको है अभिमान।
दुनिया तुझको शीश नवाती, भारतवर्ष महान।।
देवलोक में हैं गुण गाते, महिमा अपरंपार।
ले अवतार खेलने आते, दुनिया के भरतार।।१।।

आगम वेद पुराण बखाने, गौरव अमित अपार।
रामायण- गीता पूजित हैं, जीवन खेवनहार।।
मिले यहाँ संतों की वाणी, होते नित सतसंग।
संस्कृति यह है सबसे न्यारी, दिखते हैं बहु रंग।।२।।

तेरी गोदी में हैं खेले, नदियाँ- पोखर, ताल।
वन हैं और वन्य प्राणी हैं, पर्यावरण विशाल।।
मिले बराबर ममता तेरी, सब हैं तेरे लाल।
भारत माँ हम शपथ उठाते, ऊँचा होगा भाल।।३।।

बार-बार मैं जन्म यहीं लूँ, मेरा है अरमान।
तुझ पर ही मैं प्राण लुटा दूँ, मेरी होगी शान।।
जो भी सोचे कर्ज चुका दे, उसे नहीं है भान।
ऋणी रहूँ- नित गुण ही गाऊँ, इसमें ही है मान।।४।।

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लोकेन्द्र कुम्भकार
शाजापुर (मध्यप्रदेश)।

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