दोहे
दोहे-
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दूध-
1-
दूध चढ़ा शिवलिंग पे,
होय निरोगी देह।
मनहर श्रावण मास में,
कीजै शिव सें नेह।।
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दही-
2-
दही ढार शिव लिंग पे,
प्यारा श्रावण माह।
सुखमय ऐ जीवन रहे,
नहीं शोक राह।।
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शहद-
3-
शंभु लिंग पे मधु चढ़ा,
होवै श्रावण मास।
मान जहाँ में चाहिए,
बनो शंभु के दास।।
घी-
4-
गौ घृत शिव पे ढारिऐ,
बड़े देह का तेज।
नाग नाथ मन धारिऐ,
पावै सुख की सेज।।
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शक्कर-
5-
शक्कर शंकर पे चढे,
सुख कीं पड़ें फुहार।
सुखमय सब संसार हो,
छाए सुखद बहार।।
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ईत्र-
6-
इत्र बहाना प्रेम से,
शंकर के दरवार।
धर्म बेल बढ़ती रहे,
बोलो हर हर बार।।
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सुगंधित तेल-
7-
तेल सुगंधित प्रेम से,
शंकर के अंग लेप।
भौतिक सुख शिव सें मिलें,
उतरे ग़म की खेप।।
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चंदन-
8-
चंदन टीका शीश पे,
शिव शंकर की शान।
शंकर टीका कीजिए,
बढ़ता जगमें मान।।
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भांग-
9-
भांग चढ़ा शिव लिंग पे,
उतरे पापी ताप।
विजय सदा होती रहे,
करो शंभु का जाप।।
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धतूरे-
10-
पूजै पुष्प धतूर सें,
बाँझ खिलावै पूत।
भजन सुनावै राम के,
शंभु भगावें भूत।।
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प्रभुपग धूल
लक्ष्मी कान्त सोनी
महोबा
उत्तर प्रदेश