आ गई हूं तुम्हारे पास

आ गई हूं तुम्हारे पास
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अब न कोई उतना अपना लगे न उतना खास,

जब से आ गई हूं तुम्हारे पास….

मेरे माथे की शिकन भी दूर हो जाती,जब तुम होते पास..

जब से आ गई हूं तुम्हारे पास…..

तुम्हारे दरवाजे पे दस्तक देने से पहले ही आ जाती

इस बात का है तुझे
सुखद एहसास…

जब से आ गई हूं तुम्हारे पास…

कभी जो कोई दिक्कत आन पड़ी तो झट कहते

तेरी प्रार्थना पर है मुझे विश्वास….

जब से आ गई हूं तेरे पास

कभी नाखुश कोई बात पर हो जाते..

बातों को फिर हवा में उड़ाते..

नहीं देख सकते मुझे ज्यादा उदास..

ले आते मेरे लिए बेहतरीन लिबास..

चाय बनाते इलाइची वाली खास…

जब से आ गई हूं तुम्हारे पास…

हाथ जोड़ वाहे गुरु से यही करूं अरदास….

पूरी कीजिएगा सबकी आस…

जब से आ गई हूं तुम्हारे पास…

उमा “पुपुन”
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