◆ रसाल छंद ◆ विशेषता- अधर (होंठ स्पर्श रहित)

◆ रसाल छंद ◆
विशेषता-
अधर (होंठ स्पर्श रहित)
विधान~
(211  111  121,
211  121 121  1)
1-
शंकर सुख सरि जान,
टालत सदा दुख आकर।
आकर कर गुण गान,
राग सुनते सुख सागर।।
जाकर कण कण देख,
शंकर सदा शिव सुंदर।
खोजत जन जग आन,
शंकर रहें जन अंदर।।
2-
डोलत शिव जन अंग,
शंकर लगें सुख छावन।
हैं जग सुख दुख रंग,
शंकर लगें सुख सावन।।
चाहत चरणन धूल,
शंकर करो जग रोशन।
रोग हर हर अनेक,
हे हर लगा तन लोशन।।
💥🌼💥🌼💥🌼
🥀प्रभुपग धूल🥀
लक्ष्मी कान्त सोनी
महोबा
उत्तर प्रदेश

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