उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने आगरा स्थित दयालबाग शिक्षण संस्थान के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने आगरा स्थित दयालबाग शिक्षण संस्थान के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

विद्यार्थियों से नौकरी पाने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनने का आग्रह किया

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अमित खरे ने शुक्रवार को आगरा स्थित दयालबाग शिक्षण संस्थान के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर दयालबाग शिक्षण संस्थान के निदेशक प्रो. प्रेम कुमार कालरा भी उपस्थित थे।

विद्यार्थियों को स्नातक होने की बधाई देते हुए श्री खरे ने कहा कि “तीसरी दुनिया के देश से लेकर एक शक्तिशाली और प्रभावशाली लोकतंत्र तक भारत की यह यात्रा समाज के प्रत्येक वर्ग के देश के प्रति समर्पित योगदान का परिणाम है। देश के किसी भी क्षेत्र में शिक्षित लोगों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने विभिन्न दायित्वों को निभाते हुए देश की इस परिवर्तनकारी यात्रा का नेतृत्व और पथ-प्रदर्शन किया है।आज आप शिक्षित बुद्धिजीवियों की इस श्रेणी में शामिल हो रहे हैं, युवा प्रबुद्ध भारतीयों की वह श्रेणी, जो आगे चलकर दुनिया का नेतृत्व करेगी।”

श्री खरे ने विश्वास व्यक्त किया कि आज जो विद्यार्थी यहाँ से स्नातक की डिग्री ले रहे हैं, वो भविष्य के नेता बनेंगे और दुनिया का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि “यही वे युवा हैं जो हमारे देश के स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया- मेक फॉर द वर्ल्ड और आत्मनिर्भर भारत जैसे मिशनों को साकार करने का काम करेंगे।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे ‘नौकरी मांगने वाले’ नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाले’ बनें। उन्होंने कहा कि हमें विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति में निहित मूल्य प्रदान करते हुए प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत क्षमता को बढ़ावा देने, उनकी सोचने की क्षमता को विकसित करने और 21वीं सदी और विश्व का नेतृत्व करने लिए उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करने की जरूरत है।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री खरे ने कहा कि कोविड महामारी ने विद्यार्थियों को जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण दिया और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए उन्हें तैयार किया है।

उन्होंने क्वांटम कम्प्यूटिंग, टेक्सटाइल डिजाइनिंग से लेकर संगीत जैसे विविध विषयों में बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करने के लिए डीईआई के प्रयासों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में जिन सिद्धांतों की सिफारिश की गई है, डीईआई द्वारा उन्हीं सिद्धांतों का विजन 2031 में समर्थन करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने मूल्य आधारित गुणवत्तापरक शिक्षा, समावेशिता, बहुविषयकता, अनुसंधान, आईसीटी का सदुपयोग जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया है, जिसका राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ बेहतर तालमेल है।

इस संदर्भ में उन्होंने कुछ साल पहले प्रो. कालरा के साथ हुई अपनी बातचीत को याद करते हुए का कि श्री कालरा ने उस समय कहा था कि दयालबाग एक विशेष संस्थान है, जो शिक्षा और मूल्यों को एक साथ लेकर आगे बढ़ता है। इन्हीं शिक्षा और मूल्यों पर अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बल देती है।श्री खरे ने कहा कि दयालबाग शिक्षण संस्थान हमेशा से ही अपने दर्शन और दृष्टिकोण के मामले में अपनी सोच से कई गुना आगे रहा हैऔर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शामिल कई विचार दयालबाग शिक्षण संस्थान के स्वभाव और कार्यप्रणाली में पहले से ही निहित हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की बढ़ती उपस्थिति का उल्लेख करते हुए, सचिव श्री खरे ने बताया कि आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए भारत के निर्णायक प्रयासों की जमकर सराहना की।

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे उन लोगों की मदद करें जिनके पास सुविधाएं नहीं हैं और अच्छी शिक्षा से मिलने वाले फायदों से वंचित हैं।उन्होंने छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की।

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