रणमें लड़ते लाल माँ झुकते नहीं। लगते रण में काल वो रुकते नहीं।।
तर्ज-
दिल के अरमा आसुओं में—
🥀राष्ट्रीय गीत🥀
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रणमें लड़ते लाल माँ झुकते नहीं।
लगते रण में काल वो रुकते नहीं।।
लख मिले मिट्टी में तन मुड़ते नहीं।
लगते रण में काल—–
बिलखती मात नयन जल थमते नहीं।
गोद के हीरे नयन लखते नहीं।।
लख मिले—–
सेंदुर उजड़े मांग के विछुड़े सजन।
अब नयन से प्रीत मन दिखते नहीं।।
लख मिले—
कैसे जाएँ भूल दिल सपने सजे।
आज भी वो लाल उर टलते नहीं।।
लख मिले—–
आँखे भरके याद हम उनको करें।
आपके बिन आज दिल खिलते नहीं।
लख मिले—
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🥀प्रभु पग धूल🥀
लक्ष्मी कान्त सोनी
महोबा
उत्तर प्रदेश